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काशी के सन्तों ने राष्ट्रवादी सरकार की पुन: वापसी का आह्वान किया, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी थे मौजूद

संस्कृति विमर्श में विषय प्रवर्तन करते विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख अशोक तिवारी जी ने कहा कि काशी दुनिया की दिशा तय करती है। हम सक्रिय रहें एवं सब प्रकार सनातन शक्तियों को सशक्त करने वालों को मजबूत करने हेतु सक्रिय हों।

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अयोध्या में दीपावली मनाने के लिए 500 साल का इंतजार करना पड़ा:– धर्मेंद्र प्रधान

नवीन तिवारी। 28 फरवरी को अखिल भारतीय संत समिति, उत्तर प्रदेश ,गंगा महासभा, वाराणसी, श्रीकाशी विद्वत परिषद एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण विद्वत परिषद न्यास के संयुक्त तत्वावधान में काशी के पीठाधिपतियों तथा महन्तों के सानिध्य में काशी के विद्वानों एवम् प्रबुद्ध जनों का सम्मेलन ‘संस्कृति विमर्श’ श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय, दुर्गाकुंड के प्रांगण में आयोजित हुआ। जिसमें काशी के विभिन्न संप्रदायों के सैकड़ों सन्तों एवं अखाड़ों के महंतो की उपस्थिति रही। इसके साथ पद्म अलंकरणों से सम्मानित अनेक विशिष्टजन भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि दिसम्बर 2023 में राम मंदिर बन जायेगा। तब तक हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी राम लक्ष्मण की भांति संतो के इस यज्ञ की रक्षा करें, यही हमारा अभीष्ट है। जो राजनेता या दल भारत देश के हज़ारों वर्ष पूर्व के प्राचीन तीर्थस्थलों की चिंता नही करते उन्हें सत्ता प्राप्त नही होगी, यह निश्चित है।

आज साधु-सन्त सम्मान के साथ जी रहे हैं। भगवान श्रीराम ने टेंट में दो बनवास (28 साल) काटे, यहाँ तक फ़टे कपड़े को बदलने के लिए हमें कोर्ट से परमिशन माँगना पडता था। 2023 अब वहाँ भव्य मंदिर बन जायेगा। आज जब केदारनाथ में आचार्य शंकर की मूर्ति का अनावरण होता है, हैदराबाद में रामानुजाचार्य की मूर्ति अनावरण होता है, काशी में विश्वनाथ धाम कॉरिडोर विकसित होता है और ब्रज की परिक्रमा विकसित होती है तब हमें हार्दिक प्रसन्नता होती है।

भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संस्कृति विमर्श को सम्बोधित करते हुए कहा कि अयोध्या में दीपावली मनाने के लिए 500 साल का इंतजार करना पड़ा। पहले हमारे देश के प्रधानमंत्री अमेरिका के व्हाइट हाउस के सामने वाले लॉज में कई दिनों तक इंतजार करते थे और आज दुनिया में कहीं तनाव हो लोग हमसे मध्यस्थता की गुहार लगा रहे हैं। यह काशी का महात्म्य और काशी की महिमा है। भगवा इस देश के समता का प्रतीक है। असुर शक्ति में विश्वास करने वाले दुर्जनों को सबक सिखाना है। भारत की ताकत बढ़ाने वालों की शक्ति तब बढ़ेगी जब उत्तर प्रदेश में  भी भारत के ताकत बढ़ाने वाले सशक्त होंगे।

संस्कृति विमर्श में विषय प्रवर्तन करते विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख अशोक तिवारी जी ने कहा कि काशी दुनिया की दिशा तय करती है। हम सक्रिय रहें एवं सब प्रकार सनातन शक्तियों को सशक्त करने वालों को मजबूत करने हेतु सक्रिय हों।

श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो रामनारायन द्विवेदी जी ने कहा कि आप सभी संत विद्वतजन निर्णयक भूमिका में हैं। समाज में जागरण कर आपको बताना कि आपका मत राष्ट्र की चेतना को संचार करने वाली शक्तियों की प्राप्त हो। इससे उनका उत्साह बढ़ेगा और हमारा राष्ट्र समृद्धि को प्राप्त करेगा। आप एक एक ब्यक्ति एक एक संस्था का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जब आप किसी को मतदान के लिए प्रेरित करेंगे उसके अंदर जागृति आएगी। वाराणसी की सभी सीटों पर 80-90 फीसदी तक मतदान हो ऐसा प्रयास करें। काशी विश्वनाथ धाम को विश्वस्तरीय बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जाता है जो आप सभी के आशीर्वाद से सम्भव हुआ है।

अखिल भारतीय ब्राह्मण विद्वत परिषद न्यास के अध्यक्ष पं प्रमोद मिश्र ने हिन्दू समाज को विभाजित करने वाली शक्तियों को पराजित करने का आह्वान किया।

गंगा महासभा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री गोविंद शर्मा जी ने कहा कि एक समय था जब हमने कैप्टन सौरभ कालिया का शव क्षत विक्षत अवस्था में मिला था और आज विंग कमांडर अभिनन्दन पाकिस्तान से सकुशल वापिस लौटकर आता है। मुगलसराय, फैजाबाद और इलाहाबाद का प्राचीन नाम योगी ने बहाल किया।यह सब आपके आशीर्वाद और मतों के सही उपयोग होने पर ही सम्भव हुआ है। योगी जी को आपके आशीर्वाद की आज पुनः आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री राजेश्वर आचार्य जी ने भारत की प्राचीन गौरवशाली आध्यात्मिक संस्कृति की धृति को आत्मसात करने वाले समर्पित नेतृत्त्व को पुनः लाने की कामना व्यक्त की। पद्मश्री श्री रजनीकांत द्विवेदी, जगद्गुरु रामानुजाचार्य पुण्डरीक शास्त्री ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया।

सम्मेलन में पद्मश्री प्रो के के त्रिपाठी, प्रो चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रो भगवत शरण शुक्ल, प्रो ओमप्रकाश सिंह, पं सतीशचंद्र मिश्र, श्रृंगेरी शंकराचार्य के प्रतिनिधि महंत श्री चल्ला सुब्वाराव शास्त्री, काँची शंकराचार्य के प्रतिनिधि वी. एस. सुब्रमण्यम मणि, पं दीपक मिश्रा पं ब्रजभूषण ओझा जी सहित विभिन्न विभूतियों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर विपिन सेठ, विद्यासागर उपाध्याय श्री विनय तिवारी, डॉ प्रीतेश आचार्य, कृष्णमोहन सहित सैकड़ों प्रबुद्ध युवाजन भी उपस्थिति रहे।

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