कानून बनाने वाले ही अपराधी हों तो न्याय की उम्मीद किससे: माया श्रीवास्तव का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

बेंगलुरु में आयोजित एक महिला सम्मेलन में केंद्र सरकार की नीतियों और चुप्पी को लेकर तीखे सवाल उठे। माया श्रीवास्तव के बयान ने महिला सुरक्षा और न्याय को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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महिला सुरक्षा
महिला सुरक्षा पर माया श्रीवास्तव का केंद्र सरकार पर हमला
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बेंगलुरु के सरजापुर में आयोजित समर्थ नारी समर्थ भारत के कार्यक्रम में संगठन की राष्ट्रीय सह संयोजिका और बिहार झारखंड व पश्चिम बंगाल की प्रभारी माया श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब कानून बनाने वाले ही अपराधी प्रवृत्ति के हों तो आम महिलाओं को न्याय की उम्मीद किससे करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से कथनी और करनी में समानता लाने की अपील की।

माया श्रीवास्तव ने हालिया बिहार की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच पर एक नवोदित डॉक्टर का हिजाब खींचा जाना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अब तक कोई बयान क्यों नहीं आया। उन्होंने कहा कि जब गठबंधन सरकार के नेता पर भी कार्रवाई नहीं होती तो महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर कैसे भरोसा करें।

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महिला सुरक्षा

उन्होंने वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद दिए गए आश्वासनों की याद दिलाते हुए कहा कि महिला सुरक्षा को लेकर किए गए वादे जमीन पर दिखाई नहीं देते। हाथरस कांड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक दलित महिला के साथ हुई बर्बरता और उसके बाद प्रशासन द्वारा शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करना मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन था।

माया श्रीवास्तव ने 2023 में महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि इतने गंभीर मामलों में भी सत्ता के शीर्ष स्तर से न तो खुला समर्थन मिला और न ही त्वरित न्याय। उन्होंने मणिपुर की घटनाओं को भी बेहद चिंताजनक बताया जहां महिलाओं के साथ हुई बर्बरता के वीडियो सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश फैला।

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उन्होंने कहा कि बार बार सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है जो सरकार की निष्क्रियता को दर्शाता है। माया श्रीवास्तव ने याद दिलाया कि एक समय प्रधानमंत्री मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाते थे लेकिन आज की स्थिति में मौजूदा चुप्पी खुद सवालों के घेरे में है। उन्होंने महिलाओं से आगे आकर उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुमन पटवारी संचालन रुचिका जैन, धन्यवाद ज्ञापन स्वर्णलता ने किया। इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं आशा मजुमदार,बिना राठौड़,लतिका झुनझुनवाला,इंद्राणी प्रिया झुंझुवाला,सुजाता राठौड़,खुशबू नागर रश्मि अग्रवाल,विंदु कारण,अमृता धारीवाल,रानी मोदी, गीता नगर, लीना सिंहा,कविता जोशी,सरोज जायसवाल, इत्यादि मौजूद रहीं।

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