बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया। सदन में फ्लोर टेस्ट ध्वनिमत से पारित हुआ। इसके बाद स्पीकर प्रेम कुमार ने नई सरकार को बधाई दी। बहुमत प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर सीधे निशाना साधा और कई मुद्दों पर जवाब दिया।
नाम, उम्र और कानूनी मामलों पर जवाब
सदन में चल रही चर्चाओं के बीच सम्राट चौधरी ने अपने नाम, उम्र और पुराने मामलों को लेकर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर वे नाबालिग होते, तो उन्हें जेल की जगह बाल सुधार गृह भेजा जाता।
उन्होंने बताया कि 1985 और 1995 के मामलों में वे जेल में रहे और ये मामले निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और न्यायालय के आदेशों का पालन किया।
एफिडेविट विवाद पर सफाई
एफिडेविट को लेकर उठे विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक दस्तावेज किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्रमाणित नहीं होते, तब तक उन्हें शपथ पत्र में शामिल नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि 1999 में पहली बार मंत्री बनने के बाद से अब तक वे कई बार मंत्री रहे और अब मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने अपनी योग्यता और दस्तावेजों को पूरी तरह पारदर्शी बताया।
सम्राट चौधरी ने कहा कि वे लालू यादव के शासनकाल में हुए अत्याचारों के कारण राजनीति में आए। उनका कहना था कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत रही।
उन्होंने कहा कि राजद के शासन का विरोध करना उनकी राजनीति का मूल आधार रहा है और इसी वजह से उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता किसी की निजी संपत्ति नहीं है और यह जनता के विश्वास से मिलती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का पद बिहार की जनता के समर्थन का परिणाम है।
तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने परिवार में सम्मान नहीं देता, वह दूसरों को सम्मान सिखाने की बात न करे। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों का जवाब व्यक्तिगत रूप से दिया जाएगा।






















