दरभंगा राज की अंतिम महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी का निधन, भारत रत्न की मरणोपरांत मांग तेज

मधुबनी जिला अध्यक्ष साधना अरुण कारण ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने महारानी से मुलाकात की थी और उनके कार्यों की पूरी जानकारी संगठन को दी थी। प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा पाठक, दरभंगा जिला अध्यक्ष, मधुबनी जिला अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों ने कहा कि महारानी ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सामाजिक संस्थाओं के लिए बड़ी मात्रा में जमीन दान की थी।

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दरभंगा राज की अंतिम महारानी
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दरभंगा राज की अंतिम महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी साहिबा अब हमारे बीच नहीं रहीं। 96 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से मिथिला ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर है। सादगी, शिक्षा, परोपकार और राष्ट्रभक्ति के लिए पहचानी जाने वाली महारानी का जीवन त्याग और सेवा का प्रतीक रहा।

अधिरानी कामसुंदरी देवी, महाराजा अधिराज कामेश्वर सिंह प्रसाद की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। उन्होंने राजसी वैभव के बावजूद सादा जीवन जिया। उनका योगदान सिर्फ दरभंगा राज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है।

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देश की रक्षा के लिए 600 किलो सोना किया दान

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जब देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब महारानी कामसुंदरी देवी ने राष्ट्र रक्षा के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने करीब 600 किलो सोना, लगभग 90 एकड़ जमीन, करोड़ों रुपये की संपत्ति, अपने तीन निजी विमान और दरभंगा स्थित निजी हवाई अड्डा तक देश को समर्पित कर दिया। उनका यह त्याग आज भी देशभक्ति का दुर्लभ उदाहरण माना जाता है।

महाराज के निधन के बाद उन्हें संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़े कई कानूनी विवादों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कभी गरिमा और संयम नहीं छोड़ा। शिक्षा, अस्पताल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाओं के लिए भूमि दान कर उन्होंने मिथिला के विकास की नींव मजबूत की।

Darbhanga Raj Maharani Kamsundari Devi
Darbhanga Raj Maharani Kamsundari Devi

मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग

समर्थ नारी, समर्थ भारत की राष्ट्रीय सह-संयोजिका और कायस्थ महासभा की प्रदेश महामंत्री माया श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महारानी कामसुंदरी देवी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि जीवनकाल में उन्हें यह सम्मान नहीं मिला, लेकिन उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना चाहिए।

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मधुबनी जिला अध्यक्ष साधना अरुण कारण ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने महारानी से मुलाकात की थी और उनके कार्यों की पूरी जानकारी संगठन को दी थी। प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा पाठक, दरभंगा जिला अध्यक्ष, मधुबनी जिला अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों ने कहा कि महारानी ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सामाजिक संस्थाओं के लिए बड़ी मात्रा में जमीन दान की थी।

संगठनों का आरोप है कि इतनी बड़ी राष्ट्रसेविका के निधन पर न तो किसी मंत्री ने श्रद्धांजलि दी और न ही उन्हें राजकीय सम्मान मिला। यहां तक कि मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या किसी बड़े सार्वजनिक व्यक्ति की ओर से औपचारिक श्रद्धांजलि भी सामने नहीं आई। इसे लेकर समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

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समर्थकों का कहना है कि महारानी कामसुंदरी देवी सिर्फ एक राजघराने की सदस्य नहीं थीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रसेवा की जीवंत प्रतीक थीं। उनका जीवन उदारता, कर्तव्यनिष्ठा और मातृत्व भाव से भरा रहा। आज उनके जाने से ऐसा लग रहा है जैसे एक मां सबको छोड़कर चली गई हो।

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