यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, सवर्ण समाज ने बताया ऐतिहासिक फैसला

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को सवर्ण समाज ने न्यायपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला बताया है। समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि इस आदेश से सामाजिक तनाव और भेदभाव की आशंकाओं पर विराम लगा है।

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यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
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यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को लेकर सवर्ण समाज में संतोष और राहत का माहौल है। इस फैसले को समाजहित में एक बड़ा और न्यायपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

प्रोफेसर अमरेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के उस कानून पर तत्काल रोक लगाकर ऐतिहासिक फैसला दिया है, जिसे समाज तोड़ने वाला और समाज को विभाजित करने वाला बताया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इस आदेश से वर्ग संघर्ष, जातीय तनाव और सामाजिक असंतुलन जैसी आशंकाओं पर विराम लगा है। यह फैसला पूरे समाज के हित में है और देश को टकराव की स्थिति से बचाने वाला है।

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एस फोर प्रदेश महिला अध्यक्ष एवं कायस्थ महासभा की प्रदेश महामंत्री माया श्रीवास्तव ने कहा कि यह फैसला उस सवर्ण समाज के अस्तित्व और सम्मान की रक्षा करने वाली हवा है, जिसने भारत को संवारने, सजाने और सुरक्षित रखने में अपना सर्वस्व समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि आज सवर्ण समाज पर फिर से गंभीर खतरा मंडरा रहा था। असंवेदनशील यूजीसी बिल ने समाज की नींव को हिला दिया था। इस बिल के चलते पढ़ने-लिखने वाले बच्चों पर बिना किसी अपराध के ही अपराधी होने का ठप्पा लगने की स्थिति बन गई थी। इससे बच्चों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही थी और उनके संवैधानिक अधिकार भी खतरे में पड़ रहे थे।

उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज मूकदर्शक बनकर अपने भविष्य को यूं ही खतरे में नहीं देख सकता। यह केवल एक कानून का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। सवर्ण समाज वही समाज है जिसने मुगल आक्रांताओं और अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर किया। महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, राणा सांगा, रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंवर सिंह, मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद, रास बिहारी बोस, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और लाल बहादुर शास्त्री जैसे असंख्य महापुरुषों की परंपरा आज भी सवर्ण समाज को राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाती है।

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इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में भी सवर्ण समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। दरभंगा महाराज द्वारा दी गई जमीन और महल का दान हो या पटना में सच्चिदानंद सिन्हा द्वारा बिहार विधानसभा, एयरपोर्ट, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और आधे शहर को संवारने के लिए दी गई संपत्तियां, ऐसे असंख्य उदाहरण हैं। समाज के लोगों ने सोना, चांदी, जमीन और मकान तक दान कर देश को मजबूत और व्यवस्थित बनाया है। इस योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

सवर्णं समाज के खिलाफ साजिश बर्दाश्त नहीं – माया श्रीवास्तव

माया श्रीवास्तव ने साफ शब्दों में कहा कि सवर्ण समाज के बच्चों के खिलाफ किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, खासकर तब जब वह उसी सरकार से जुड़ी हो जिसे समाज ने समर्थन देकर सत्ता में पहुंचाया।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करने वालों में प्रो. अमरेश श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय सवर्ण मोर्चा बिहार, माया श्रीवास्तव, एस फोर सवर्ण प्रदेश महिला अध्यक्ष, राज सिन्हा, प्रोफेसर योगेन्द्र सिंह, प्रो. विभा कुमारी, निर्मला कुमारी, संजय सिन्हा, पुष्पा पाठक, संजय सहाय, दीपक श्रीवास्तव, वीरेंद्र कुमार तिवारी, निरू सिंह, सरिता सिंह, अनीता मिश्रा, संगीता दुबे, रागिनी सिंह, बिना पाठक, रीता सेन, कामिनी कारण, अनामिका दत्ता, सविता महेश्वरी, स्वेच्छा शर्मा, विनय महेश्वरी, सौरभ सिंह, प्रेम कुमार सहित बड़ी संख्या में सवर्ण समाज की शख्सियतें शामिल रहीं। सभी ने एक स्वर में कहा कि यूजीसी का यह कानून सवर्ण समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा और सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्याय की जीत है।

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