बिहार चुनाव – अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी लोजपा, नीतीश का नेतृत्व स्वीकार नहीं

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर हुई मशक्कत के बाद आखिरकार लोजपा ने एनडीए से नाता तोड़ लिया है। लोजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक में फैसला लिया गया है कि बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा अकेले ही उतरेगी। लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के नेतृत्व को नकार दिया है और अब सबकी निगाहें चिराग पासवान पर ही टिकी हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में सभी सदस्यों की मौजूदगी में यह बड़ा निर्णय लिया गया। इस संसदीय बोर्ड की मीटिंग में लोजपा नेताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।

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जानकारी के मुताबिक, लोजपा ने कुछ अलग करते हुए लोजपा-भाजपा सरकार का प्रस्ताव पारित किया है। इस हिसाब से चुनाव के बाद लोजपा के सभी विधायक भाजपा को समर्थन देंगे। लोजपा पिछले एक साल से बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट के मुद्दों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

दूसरी तरफ जदयू और भाजपा के बीच सींट बंटवारें का फर्मूला तय हो गया। भाजपा और जदयू 119-119 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। जबकि सहयोगी दल हम के लिए 5 सीटें छोड़ी गई हैं।

लोजपा के अलग होने से भाजपा को फायदा

पहले यह तय किया गया था कि बीजेपी अपने कोटे में से लोजपा को भी सीट देगी। लेकिन अब लोजपा द्वारा अलग राह अपनाने के बाद बीजेपी पूरे 119 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। आंकड़ों को देखा जाए तो बीजेपी ने एक तरह से जदयू को साधने की कोशिश की है। कभी बीजेपी बिहार में एंट्री के लिए जदयू का सहारा लेती थी। अब धीरे-धीरे बीजेपी ने बिहार में अपना पैठ बनाना शुरु कर दिया है।

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सीट बंटवारे का यह समीकरण जदयू के कम होते प्रभाव को भी दिखाता है। वहीं सीट बंटवारे के बाद कई सीट भाजपा के खाते में जाने से जदयू के अंदर भी नाराजगी सामने आने लगी है।

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